Lepakshi Temple History in Hindi | हवा में झूलता है मंदिर का खम्बा Hanging Pillar

Lepakshi Temple History in Hindi:- भारत के आंध्रप्रदेश(Andhra Pradesh) राज्य में एक छोटा सा गाँव है लेपाक्षी(Lepakshi). इस मंदिर के परिसर(premises) में भगवान श्री विष्णु(Lord Vishnu), भगवान श्री महादेव(lord Shiva) और भगवान श्री वीरभद्र(lord Veerbhadra) के तीन मंदिर उपस्थित हैं. प्राचीन समय से ही यहाँ के लोगों की मान्यता है की लेपाक्षी(Lepakshi) ही वो जगह जहाँ रामायणकाल के दौरान जटायु रावण से युद्ध करते समय घायल होकर गिरा था.lepakshi temple history in hindi

क्या है लेपाक्षी मंदिर का रहस्य? Lepakshi temple history in hindi

इस मंदिर(temple) का रहस्य(mystery) दुनिया भर के लोगों को आश्चर्यचकित(Surprised) कर देता है. लेपाक्षी मंदिर में कुल 70 स्तंभ(Pillar) हैं. परन्तु इन सभी स्तंभों(pillars) एक ऐसा स्तंभ है, जो हवा में लटका(hang) हुआ रहता है. वह जमीन(earth) से कुछ ऊपर उठा हुआ है, मानो हवा में झूल रहा हो.

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मंदिर के इस रहस्य(mystery) को देखने के लिए यहाँ आने वाले लोग इस खम्बे(pillar) के नीचे से कपड़ा जैसे रुमाल, चादर आदि को निकाल कर देखते हैं. और कपड़ा सरलता से इस स्तम्भ(pillar) के नीचे से होकर गुजर जाता है. जिसे देखकर सभी आश्चर्यचकित(surprised) हो जाते हैं, कि यह स्तम्भ(pillar) बिना किसी सहारे(support) के हवा में कैसे लटका हुआ है. और मंदिर इस खम्बे(pillar) पर कैसे टिका हुआ है.

लेपाक्षी मंदिर का निर्माण की कहानी | Hanging Pillar of Lepakshi Temple

यह मंदिर आंध्रप्रदेश के अनंतपुर(Anantpur) के निकट ही एक छोटा सा गाँव(village) है लेपाक्षी(Lepakshi) जहाँ यह भव्य मंदिर(temple) स्थित है. पहाड़ी पर होने के कारण इस मंदिर(temple) को कूर्म सैला भी कहते हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार लेपाक्षी मंदिर(lepakshi Temple) का निर्माण अगस्त्य ऋषि ने करवाया था. यहाँ पर भगवान श्री वीरभद्र(lord Veerbhadra) का मंदिर भी उपस्थित है जिसके कारण यहाँ की देवी को भद्रकाली कहकर पुकारा जाता है.

इस मंदिर का नाम लेपाक्षी क्यों पड़ा? Lepakshi Temple History in Hindi

लेपाक्षी मंदिर(lepakshi temple) का सम्बन्ध रामायणकाल से है. एक पौराणिक कथा के अनुसार जब रावण सीता माता का अपहरण(kidnapped) करके अपने पुष्पक विमान से लंका लेकर जा रहा था. तभी जटायु ने उसे रोकने के लिए युद्ध किया. जिसमे जटायु घायल(injured) होकर धरती पर गिर गए, श्री राम सीता की खोज करते हुए इस स्थान पर पहुंचे और घायल(injured) जटायु से मिले. तब श्री राम ने जटायु को ‘ले पाक्षि’ कहकर पुकारा था. ले पाक्षि तेलगु शब्द है, जिसका हिंदी में अर्थ है ‘उठो पक्षी’ तभी से इस जगह का नाम लेपाक्षी(lepakshi) पड़ गया.

अद्भुत शिवलिंग उपस्थित है यहाँ | Lepakshi Temple History in Hindi

लेपाक्षी मंदिर hanging pillar के कारण तो प्रसिद्ध है ही परन्तु और भी कुछ ऐसे कारण हैं जो इस मंदिर को और भी अधिक अद्भुत और रहस्यमय बनाते हैं.

इस मंदिर(temple) में एक अद्भुत स्वयंभू शिवलिंग जो लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है. यहाँ शिवलिंग भगवान शिव(Lord Shiva) के रौद्र रूप का प्रतीक माना जाता है जिन्हें वीरभद्र कहा जाता है.

पास ही में एक शिवलिंग और स्थित है मान्यता है कि इस शिवलिंग की स्थापना भगवान् श्री हुनमान जी ने की थी, इसीलिए इसे हनुमालिंगेश्वर के नाम से जानते हैं.

रामलिंगेश्वर नाम का एक और शिवलिंग यहाँ मौजूद है, जिसके बारे में लोगों का कहना है कि जटायु का अंतिम संस्कार करने के बाद स्वयं भगवान श्री राम ने इस शिवलिंग को बनवाया था. इसलिए इसका नाम रामलिंगेश्वर पड़ गया.

नंदी की सबसे विशाल मूर्ती Largest Statue of Nandi

यहाँ भगवान् शिव(Lord Shiva) की सवारी नंदी की सबसे विशाल प्रतिमा(Statue) उपस्थित है. जिसके लम्बाई 27 फीट और ऊँचाई 15 फीट है. इस प्रतिमा(Statue) की विशेषता है कि यह अभी तक की एक ही पत्थर से बनी सबसे विशाल मूर्ती है.

नागलिंग प्रतिमा(statue of nagling)

वीरभद्र मंदिर(Veerbhadra Temple) के पास एक बहुत ही बड़ी नागलिंग प्रतिमा(Statue) है जिसमे सात फन वाला नाग शिवलिंग के ऊपर बैठा है. यह प्रतिमा(Statue) भी एक ही पत्थर से बनी है. Lepakshi Temple History in Hindi

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