Kamakhya Temple History in Hindi | कामख्या देवी मंदिर | Kamakhya Mandir Guwahati

Kamakhya Temple History in Hindi: भारत में अनेकों मंदिर हैं, इन मंदिरों में कुछ मंदिर ऐसे हैं जो रहस्यों से भरे हैं. ऐसा ही एक मंदिर है कामाख्या मंदिर. कामाख्या देवी मंदिर रहस्यों से भरा हुआ है. यह मंदिर असम(Asam) के गुहाटी शहर में स्थित है. कामाख्या मंदिर देवी के 52 शक्तिपीठों में से एक है. इस शक्तिपीठ को अन्य सभी शक्तिपीठों में सर्वोच्च मन जाता है. कामाख्या देवी को सृष्टि की जननी का द्वार कहते है.Kamakhya Temple History in Hindi

Kamakhya Temple History in Hindi | Kamakhya Mandir Guwahati

इस शक्तिपीठ को 16वीं शताब्दी में नष्ट(destroy) कर दिया लेकिन 17वीं शताब्दी में राजा नर नारायण ने इसे दुबारा से बनवाया. प्राचीन समय की बात है, देवी सती के पिता दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन करवाया, परन्तु देवी सती के पिता दक्ष ने भगवान् शिव(Lord Shiva) को आमंत्रित नहीं किया. इस कारण देवी सती ने उसी यज्ञ की अग्नि में कूद कर आत्मदाह कर दिया. यह देख भगवान् शिव क्रोधित हो उठे और सती के शव को लेकर तांडव करने लगे.

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भगवान् शिव के क्रोध और सती के प्रती उनके मोह को भंग करने के लिए भगवान् विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के 51 टुकड़े कर दिए. जहाँ जहाँ सती के शव के अंग गिरे उन जगहों को आज शक्तिपीठ के रूप में जाने जाते हैं.

नीलांचल पर्वत मालओं के बीच इस स्थान पर माता सती का योनि भाग गिरा था, जो आज कामाख्या के नाम से जाना जाता है. यह शक्तिपीठ सभी शक्तिपीठों में सर्वोच्च मन जाता है.

Kamakhya Temple History in Hindi | कामाख्या मंदिर का इतिहास

कामाख्या देवी मंदिर का तांत्रिक महत्व

कामाख्या देवी के मंदिर का तांत्रिक महत्व भी बहुत ज्यादा है. बड़े बड़े तांत्रिकों का मानना है कि इस मंदिर में हर प्रकार की तांत्रिक सिद्धियाँ प्राप्त की जा सकती हैं. यह स्थान तंत्र साधना का एक बहुत बड़ा केंद्र है. कामाख्या मंदिर में हर साल अम्बुवासी मेले लगता है. अम्बुवासी मेले में बहुत से तांत्रिक भाग लेते हैं.

देवी के इस शक्तिपीठ पर माता सती का योनि भाग है जिस कारण माता सती राजस्वला होती हैं. प्रत्येक वर्ष यहाँ होने वाले अम्बुवासी मेले के समय यहाँ से बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी 3 दिनों के लिए लाल हो जाता है. लोगों को मानना है कि नदी के पानी का लाल रंग माता कामाख्या के मासिक धर्म होने के कारण होता है.

कामख्या देवी की अन्य कथाएं

एक कथा के अनुसार कामदेव जब अपना पुरुषत्व खो बैठे थे तब कामदेव ने माता कामाख्या की मदद से उन्होंने अपना पुरुषत्व दुबारा पाया था.

एक और कथा के अनुसार यहाँ इस स्थान पर भगवान् शिव और देवी पार्वती के बीच प्रेम का प्रारम्भ हुआ था जिसे संस्कृत में काम कहा गया. काम से ही इस मंदिर का नाम कामाख्या पड़ा है.

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कामाख्या देवी(kamakhya devi) को रक्त की देवी भी कहकर पुकारा जाता है. मान्यता है कि कामाख्या देवी का हर साल जून के महीने में रजस्वला होती है जिसके कारण ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है. इस दौरान 3 दिनों के लिए कामाख्या देवी का मंदिर बंद हो जाता है और अम्बुवाची पर्व का आयोजन किया जाता है. इस दौरान अनेक साधू और तांत्रिक इस मेले में शामिल होते है.

Kamakhya Mandir Guwahati: आपको कामाख्या देवी से सम्बंधित ये जानकारी अच्छी लगी हो तो नीचे कमेन्ट में लिखना न भूले. और यदि कामाख्या मंदिर की इस जानकारी में कुछ त्रुटी हो तो माफ़ी चाहते हैं. धन्यवाद् !

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